हम क्या हैं?
हम अनगिनत सरनेम(बरई,बरुई,बरुजीवी, चौरसिया, नाग,नागवंशी,भगत,राऊत,शर्मा,तिवारी,तमोली, तंबोली, भारद्वाज,कटियार,वर्मा और अनगिनत …..) से जाने जाते है और सनातन हिंदू धर्म के अभिन्न अंग हैं – लेकिन पिछले तीन पीढ़ी से लेकर आज का युवा भी नहीं समझ पा रहा कि हम ब्राह्मण, वैश्य या शूद्र में से हैं क्या ?🤔
यदि हम सनातन धर्म में हैं तो यह हम में से प्रत्येक के लिए जानना अनिवार्य आवश्यकता है।💪
जब हमें अपने आप को सही समझेंगें और दूसरे को गर्व से समझा पायेंगे तभी हम राजनीतिक या कोई भी भागीदारी किसी व्यवस्था से अधिकार के साथ ले सकते हैं।
पहले क्या थे,अब क्या हैं और भविष्य में क्या बनना चाहते हैं ?✊
अबतक का सबसे नवीनतम रिसर्च और कई वर्षों के गहन अध्ययन और प्रयास के बाद प्रख्यात लेखक ,प्राचार्य श्री रमेश चौरसिया जी द्वारा लिखित पुस्तक पढ़िए, जानिए, विश्लेषण कीजिए
हमारी “असली पहचान” के नाम पर संस्कृति और संस्कार ही बचे हैं , बाकी से तो हम अज्ञानता वश दूर हो चुके हैं या दूर होते जा रहे हैं। सीमित सोच, छवि और पहचान के मकड़जाल में सिमट कर रह गए हैं।
कृपया इतिहास के महत्व को समझें इसे सम्हालें, संवारें और उत्कृष्टता प्रदान करें।”- DRChaurasia,Ujjain (प्रख्यात Ex वैज्ञानिक, चिंतक, लेखक, विश्लेषक)
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जब हम अपने आप को सही समझेंगें और दूसरे को गर्व से समझा पायेंगे तभी हम राजनीतिक या कोई भी भागीदारी किसी व्यवस्था से अधिकार के साथ ले सकते हैं। 💪
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अब इस ऐतिहासिक पुस्तक का PDF (पासवर्ड से सुरक्षित ) बहुत ही कम कीमत ₹220/- (जिसे पेमेंट लिंक https://paytm.me/Qjh-O4c से आप प्राप्त कर सकते हैं ।
इस संबंध में आप में से प्रत्येक बंधु मौन न रहें।
😌 आप सब बहुत विद्वान हैं क्योंकि आप दुनिया की उथल पुथल पर बहुत ध्यान रखते हैं।🙏
अपने अनुभव, विचार, सलाह, आलोचना, ऐतिहासिक तथ्य आदि बेहिचक दें – सबका स्वागत है।🤝
-चित्तरंजन,09555166382
अपने जीवन का दो-तिहाई भाग लगाकर पिछले 45 वर्षों से लगातार ‘नागबेल’ के माध्यम से अपनी कुशल लेखनी तथा तन,मन,धन से समाज की निस्वार्थ सेवा करते हुए श्री शिव कुमार चौरसिया ‘चमन ‘ ने सजातीय समाज के बारे में कुछ ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित एक लघुपुस्तिका ‘श्री चौऋषि मुनि वंश विस्तार मंजरी’ नाम से आपकी सेवा मे समीक्षार्थ निम्न प्रस्तुत की है।
यदि हम सनातन धर्मी सजातीय हैं तो निम्न को देखें,पढ़ें,समझें और अपनी प्रतिक्रिया से सक्रियता लाएं। साथ ही अपने मोबाइल कॉन्टेक्ट के माध्यम से स्वजातिय जनों को भेजें कि वे भी इस सदर्भ मे अपनी समीक्षा आवश्यक साक्ष्यों सहित अवगत कराएं।