भारत सरकार द्वारा आयोजित होने जा रही *जातीय जनगणना 2026  केवल कागजी आंकड़ों का संग्रहण नहीं है। यह हमारे समाज के लिए पिछले कई दशकों से चले आ रहे बिखराव को समाप्त करने और लोकतंत्र में अपनी वास्तविक शक्ति दर्ज कराने का एक *ऐतिहासिक एवं निर्णायक अवसर है।

आधुनिक जनगणना की शुरुआत (1872 एवं 1881): भारत में आधुनिक और व्यवस्थित रूप से जनगणना की शुरुआत ब्रिटिश काल में वर्ष 1872 (लॉर्ड मेयो के समय)* में हुई। इसके बाद वर्ष 1881 से हर 10 साल पर नियमित (Synchronous) जनगणना शुरू की गई।

1931 की ऐतिहासिक जाति जनगणना: स्वतंत्र भारत से पहले वर्ष 1931 की जनगणना आखिरी ऐसी जनगणना थी जिसमें भारत की सभी जातियों और उपजातियों के प्रामाणिक आंकड़े विस्तार से दर्ज किए गए थे। आज भी सरकार की अधिकतर सामाजिक नीतियां उसी 1931 के डेटा के आधार पर बनाई जाती हैं।

  1. जनगणना का वर्तमान स्वरूप और इसकी डिजिटल क्रांति (2026)

वर्ष 2026 की यह जनगणना इतिहास की सबसे आधुनिक और क्रांतिकारी जनगणना होने जा रही है:

पूर्णतः डिजिटल स्वरूप (Paperless Census):* इस बार पहली बार गणना कर्मचारी मोबाइल ऐप (Mobile App) के माध्यम से घर-घर जाकर डेटा दर्ज करेंगे।

Self-Enumeration (स्वयं गणना):-

नागरिकों को यह सुविधा भी दी जाएगी कि वे स्वयं पोर्टल पर जाकर अपने परिवार की जानकारी डिजिटल रूप से भर सकें।

जाति एवं उपजाति की सटीक एंट्री: – 

इस बार जातिगत आंकड़ों को पारदर्शी तरीके से दर्ज करने का प्रावधान किया जा रहा है, जिससे हर समाज को अपनी वास्तविक आबादी साबित करने का मौका मिलेगा।

  1. चौरसिया समाज का ऐतिहासिक गौरव और वर्तमान स्थिति

गौड़ ब्राह्मण परंपरा और सांस्कृतिक विरासत

सांस्कृतिक जड़ें: –  बुजुर्गों और प्राचीन अभिलेखों के अनुसार चौरसिया समाज का रहन-सहन, जनेऊ-संस्कार, पूजा-पद्धति और जीवन शैली *गौड़ ब्राह्मण परंपराओं* से जुड़ी रही है।

ऐतिहासिक योगदान: –   हमारे पूर्वज नागवंश परंपरा और पवित्र पर्ण (नागवल्ली/पान) की खेती एवं व्यापार से जुड़े रहे। कृषि, व्यापार और उच्च सामाजिक संस्कारों के कारण समाज सदैव आत्मनिर्भर और सम्मानित रहा।

बिखराव और ‘हीन भावना’ का कारण – 

उपजातियों में विभाजन : समय के साथ हमारे समाज के लोग *बरई, तंबोली, भगत, मोदी, चौरसिया* जैसे विभिन्न उपनामों और क्षेत्रीय पहचानों में विभाजित हो गए।

संख्यात्मक उपेक्षा:

1931 के बाद से सटीक आंकड़े न होने के कारण सरकारी रजिस्टरों में हमारी आबादी खंडित (Fragmented) दिखी, जिससे हम राजनीति, शिक्षा और नीति-निर्धारण में अपना सही हक और प्रतिनिधित्व पाने से वंचित रह गए।

  1. चौरसिया समाज की सहभागिता: इस बार हमें क्या करना है?

इस जनगणना में हमारा मुख्य लक्ष्य  “संख्यात्मक एकजुटता”  और *”आत्मस्वाभिमान की वापसी”* है।

  1. जनगणना अधिकारी के आने पर सही प्रविष्टि दर्ज कराएं:

* अपने परिवार की मुख्य पहचान और ऐतिहासिक जड़ों को ध्यान में रखते हुए जाति व उपजाति के कॉलम में सही और स्पष्ट जानकारी दें।

* अपने रिश्तेदारों और ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले स्वजनों को भी समझाएं कि वे किसी भी भ्रम में न आएं।

  1. हीन भावना छोड़कर मुख्यधारा से जुड़ें:

* आरक्षण या पिछड़ेपन की मानसिकता से बाहर निकलकर अपनी सांस्कृतिक जड़ों और गौरवशाली इतिहास पर गर्व करें।

* जब हम अपनी बौद्धिक क्षमता और सांस्कृतिक पहचान (गौड़ ब्राह्मण/चौरसिया) को पुनः पहचानेंगे, तो हमारी आने वाली पीढ़ी का मनोबल और आत्मविश्वास 10 गुना बढ़ेगा।

  1. CWT लाइव कम्युनिटी सर्वे (CWT Survey Analysis)

पिछले 3-4 वर्षों से *Chaurasia World Today (CWT)* द्वारा देशभर में चलाए जा रहे निरंतर सर्वे के आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि समाज में बदलाव की लहर आ चुकी है:

1.आप ( चौरसिया, बरई , तंबोली/तंमोली ) अपने आप को हिन्दू धर्म के चार वर्णों में से किस वर्ण में समझे हैं ?

इस सर्वेक्षण में खुद ही भाग लेकर अपने घर ,परिवार ,सबंधी - सभी को भाग लेने के लिए प्रेरीत करें .

2.आपको जानने वाले आप को हिन्दू धर्म के चार वर्णों में से किस वर्ण में समझते हैं ?

इस सर्वेक्षण में खुद ही भाग लेकर अपने घर ,परिवार ,सबंधी - सभी को भाग लेने के लिए प्रेरित करें

3. जनगणना - 26 में आप अपने आप को जाति की सूची में निम्न में से किसे लिखेंगे ? ( जनगणना 26 में आपके द्वारा लिखे गए "जाति" के लिए आपसे कोई प्रमाण नहीं माँगा जाएगा बल्कि आपकी जो मर्जी वह लिखें ).

इस सर्वेक्षण में खुद ही भाग लेकर अपने घर ,परिवार ,सबंधी - सभी को भाग लेने के लिए प्रेरित करें

4. जनगणना - 26 में आप अपने आप को जाति की सूची में निम्न में से किसे लिखेंगे ? ( जनगणना 26 में आपके द्वारा लिखे गए "जाति" के लिए आपसे कोई प्रमाण नहीं माँगा जाएगा बल्कि आपकी जो मर्जी वह लिखें ).
error: Content is protected !!