आइये,अपने अपरिचित से मिलिये -सन 1952 से सोये हैं - सामाजिक क्रांति का हिस्सा बनिए ! नहीं तो,अभी नहीं तो,कभी नहीं

शादी के बंधन में बंधने से पहले कुछ ऐसे पहलू हैं जिन पर हम सब को गौर करना चाहिए।

-अगर आप वैवाहिक विज्ञापन के जरिए शादी करने जा रहे हैं तो याद रखिए प्रत्येक बात की छानबीन अवश्य कर लें जिससे बाद में पछताना न पड़े। आमतौर पर इन वैवाहिक विज्ञापनों और मूल तथ्यों में बहुत अंतर होता है। जिस प्रकार हर चमकती चीज सोना नहीं होती, उसी प्रकार इन वैवाहिक विज्ञापनों में लिखी बातों को भी आंख मूंद कर नहीं मान लेना चाहिए।

-अगर विज्ञापन आपके द्वारा दिया जा रहा है तो यह जरूर देख लें कि कहीं उसमें आपने कोई बात झूठ तो नहीं लिखी है क्योंकि कहीं आपने अगर विज्ञापन में झूठ लिख दिया तो यह मत भूलिए कि उसका खुलासा होने पर शर्मिंदगी और अनगिनत परेशानियाँ आपको ही झेलनी पड़ेगी।

अधिकतर माता पिता संतान का कुंडली,मंगली आदि मिलाते और कुछ नहीं जो की किसी का व्यक्तिगत सोंच और वरीयता होता है ।

-अपने से ऊंचे स्तर वाले विज्ञापन को देख समझ कर ही जवाब दें। कई बार माता-पिता अपने बच्चों के लिए अमीर घर की तलाश में होते हैं। मात्र अमीरी को ही प्राथमिकता न दें। सभी चीज़ों को ध्यान में रख कर ही रिश्ता जोड़ें। ऐसा न हो कि ऊंचे ख्वाब देखने के लालच में कुछ गड़बड़ हों जाए। बेटी की शादी हर मां-बाप का ख्वाब होता है। इस ख्वाब को पूरा करने के लिए वे अपना सब कुछ दांव पर लगा देते हैं। । अत: वैवाहिक विज्ञापनों को जवाब देने से पहले उनके द्वारा दी गई चेतावनी को याद रखें जिसमें पाठकों से विज्ञापनों पूरी जांच पड़ताल करने को कहा गया होता है। इस चेतावनी को पढऩे के बाद भी किसी अच्छे रिश्ते को देखते ही कई मां-बाप तुरंत हामी भर देते हैं। वे यह नहीं सोचते कि थोड़ी सी देर भले ही हो जाए परंतु अगर वे सोच-समझ कर किसी रिश्ते की हामी भरेंगे तो इसका फायदा उनकी लाडली को होगा और वो जीवन चैन से गुजार सकेगी।

  •  
  •  
  •  
  •